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ग अक्षरावरून मुलींची नावे

ग अक्षरावरून मुलींची नावे, हम कुछ नहीं सुनना चाहते। उसका वाक्य काटकर कठोर स्वर में कहा गया—हमारा आदेश स्पष्ट है, इंस्पेक्टर सबके सामने तुम्हें अपने स्पेशल रूल से पीटेगा—तुम न केवल यह आदेश जारी करोगे कि कोई बीच में न आए, बल्कि इंस्पेक्टर को सुरक्षित काली बस्ती से बाहर निकालने की जिम्मेदारी भी तुम्हारी है। रोजाना की तरह उस दिन भी सोनपुर में सन्नाटा फैला था । तभी एकाएक राज को अपने पीछे सरसराहट-सी सुनाई दी ।

सॉरी मी लॉर्ड ! मैं इस समय कोर्ट रूम में एक गवाह की हैसियत से उपस्थित नहीं हुआ हूँ बल्कि मिस्टर राज के डिफेंस काउंसल (बचाव पक्ष) की हैसियत से यहाँ आया हूँ । रोमेश की पत्नी के साथ होने वाले अत्याचारों का खुलासा भी अब समाचार पत्रों में हो चुका था । सबको जे.एन. से नफरत थी । परन्तु कानून जज्बात नहीं देखता, केवल अपराध और सबूत देखता है । जे.एन ने क्या किया, यह कानून जानने की कौशिश नहीं करेगा । रोमेश अपराधी था, कानून सिर्फ उसे ही जानता था ।

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  3. चौंकी गुलजारा भी थी परंतु उसके सांवले चेहरे पर घबराहट का कोई भाव न था जबकि रंगनाथन के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट नजर आ रही थीं, फुसफुसाया—जल्दी देख कौन है? उस लड़के की साथी ही रही होगी वो , ढूंढो उसे भी , शुरू उन्होंने किया है खत्म हम करेंगे राणा ने गरजते हुए कहा
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शटअप । जेलर ने राजदान को डांट दिया, मेरी सर्विस बुक में बैडएंट्री करने का तुम्हें कोई अधिकार नहीं । मैंने जो कहा है, वह अक्षरसः सत्य है और प्रमाणिक है ।

खून से सने कपड़े, ये देखिये! कहने के साथ जो उसने खून से सना गोविन्दा का कुर्ता उठाकर हवा में लहराया तो एक चाकू उसमें से निकलकर जमीन पर गिर पड़ा। मैंने सिर उठा कर देखा तो सुधा को घनघोर नींद के हवाले पाया। मैंने धीरे से प्रिया का हाथ अपनी छाती से उठाया और उस हाथ उस की बगल पर रख दिया।

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मेरे कानो में ये शब्द आज से नहीं तीन साल से गूँज रहे थे, आँखों के सामने तीन साल पहले का मंजर घुमने लगा. आंसू बहने लगे,

लिफ्ट आम लिफ्ट की तरह इस्पात की बनी हुई नहीं थी, बल्कि उसकी छत, दीवारें और फर्श तक कांच का था—पारदर्शी कांच के पार, ‘लिफ्ट-वे’ की दीवारें स्पष्ट चमक रही थीं—एक कोने में गैसमास्क सहित गोताखोरी का लिबास पड़ा था—पतले व्यक्ति ने उसे उठाया।बुलुविडियो

वो- आगे क्या हुआ , आगे क्या हुआ, आगे वो हुआ जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था , आयत को को वरदान मिला था , वो इन्सान नहीं थी प्रेत थी पर प्रेम गहरा था उसका, तो खुद माँ तारा ने उसे इन्सान होने का वर दिया था . मास्टर- जल्दी ही आन टूटेगी ,पीर साहब की मजार खुल गयी, आन का पहला सुरक्षा चक्र टुटा , दूसरा चक्र टुटा मंदिर खंडित होने से , रही बात नाह्र्विरो की तो , पहले भी उन्हें साधा गया है और जो काम एक बार हुआ वो फिर भी हो सकता है

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