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महाराष्ट्र ग्रामीण रोजगार हमी योजना

महाराष्ट्र ग्रामीण रोजगार हमी योजना, ससससहहहहहह...... मम्मी तो क्या हुआ यह तो तुम्हारी धुली हुई पेंटी है मैं तो तुम्हारी पहनी हुई भी चड्डी को नाक से लगा कर मस्ती से सुंघ कर उसकी मादक खुशबू का आनंद ले सकता हूं। प्रिया दीदी ने समझा कि मैने शायद कविता दीदी के साथ सेक्स किया होगा और वो ये सब सोच कर हॉट ही गई थी और वेट भी इसलिए वो मेरी शर्त मान गई

भाभी मेरे सामने खड़ी रह गई। अब मैंने उसकी चूचियों को हाथों में भर लिया, और ब्लाउज़ के ऊपर से ही सहलाने लगा। मैंने ब्लाउज़ के ऊपर से ही निपल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, जिससे मेरे मुँह में दूध आने लगा। अब मैं जब भी दिल करता है और जिस के साथ भी करता है उसे चोद लेता हूँ लेकिन भैया के ना होने पर, और एक बार जब भैया घर पर नही थे तो मैने सभी को एक बेड पर नंगा करके बारी बारी से चोदा और गान्ड भी मारी

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  1. गुलाबी खड़े-खड़े मुस्कुरा रही थी. फिर बोली, हमार देवर तो बहुत दूर रहता है. पर आपका देवर तो साथ ही रहता है.
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  3. सासुमाँ भी हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा रही थी और कह रही थी, चाट, बहु, चाट! हाय क्या रंडी बहु है हमारी! उम्म!! चाट अच्छे से! सुनो जी, जल्दी से बहु को झाड़ो और फिर मेरी चुदाई करो! अब मैं ज़ोर ज़ोर से अपना लंड प्रिया दीदी की टाइट चूत मे अंदर बाहर करने लगा दीदी को भी बहुत मज़ा आरहा था
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दीदी की बात सुनकर मैने आराम से दीदी के बूब्स पर अपना हाथ रखा और उन्हे सहलाने लगा वाउ क्या मस्त फीलिंग थी दीदी के बड़े बड़े और नरम मुलायम बूब्स तो जैसे मुझे जन्नत का मज़ा दे रहे थे अमोल बहुत जोश मे था. वह मेरे पैरों के बीच बैठ गया और उसने मेरे जांघों को चौड़ा कर दिया. फिर अपना खड़ा लन्ड मेरी फैली हुई चूत के बीच रखकर सुपाड़े को रगड़ने लगा.

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दिपु मुझसे नही हो रहा है, ये तो आज गीली भी नही हो रही है मुझे बिल्कुल मज़ा नही आरहा है तुम मेरी हेल्प कर दो ना प्ल्ज़ दीपा बेचैनी से बोली अमोल, तुम्हे जब भी मन करे गुलाबी को पकड़कर चोद सकते हो. मेरे वह बोले, तुम चाहो तो गुलाबी को रोज़ रात अपने कमरे मे लेकर सो सकते हो.

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नही, बड़े भैया. गुलाबी किशन के लन्ड पर चुदती हुई बोली, अब हम रोज अपने मरद से अपनी गांड मरा रहे हैं. अब हमे दर्द नही होता.,महाराष्ट्र ग्रामीण रोजगार हमी योजना सच कहूं भाभी, तुम्हारी चिट्ठी पढ़कर मैं ईर्ष्या से जल उठी! उफ़्फ़, कैसे कैसे मज़े तुम अपने घर पर ले रही हो. भगवान ऐसा घोर अन्याय कैसे कर सकता है! उधर तुम अपने ससुराल मे शराब पी रही हो और सबसे चुदवा रही हो. और मैं यहाँ अपनी चूत मे बैंगन पेल रही हूँ! भाभी, तुम जल्दी से मेरा कुछ इंतज़ाम करो!

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