हिंदी इंडियन सेक्स मूवी

హిందీ బిఎఫ్ హెచ్ డి

హిందీ బిఎఫ్ హెచ్ డి, ज्यों ज्यों ऑटो आगे बढ़ रही थी, सभी पैसेंजर अपनी मंजिल के पास उतर रहे थे.. सिवाए हमके, क्योंकि मैं कहां जा रही थी खुद नहीं जानती थी.... मीनल ने गाउन के बटन खोले और झुक कर अपनी चूंची ललित के मुंह में ठूंस दी. उसने एक दो बार ’गों’ ’गों’ किया पर फिर चुपचाप स्तनपान करने लगा. मीनल के उन भरे गुदाज स्तनों को देखकर दिल बाघ बाघ हो गया, ललित से मुझे जलन भी होने लगी.

अभी लाई बेटी कहकर ताईजी बाहर गयीं. मैं कमर उचकाने लगा कि मीनल की तपती गीली म्यान में अपना लंड जरा गहरा घुसेड़ सकूं तो चुदाई का और मजा आये.. इन्ही सब सोचों मे गुम था.. मेरी आँख लगी ही थी कि मेरा फोन वाइब्रट करने लगा..मैने देखा कोई अकनोन नंबर. है मैने कॉल पिक की..

मेरे चेहरे पर हल्की सुकून की लकीरें उभर आई और अंदर खुशी...मतलब श्याम पूजा को बुलाने गए हैं..मेरे कदम पूजा के कमरे की ओर बढ़ने लगी...और गेट पर रूक अंदर के नजारे देखने लगी... హిందీ బిఎఫ్ హెచ్ డి मैं तो खुद ही हैरान रह गई कि आखिर श्याम इतने हैरान क्यों हो रहे हैं मुझे ऐसी भेष में देख के।फिर कुछ देर यूँ ही गेट के पास खड़ी रहने के बाद धीरे से श्याम की तरफ बढ़ने लगी।

पोट साफ होण्याचे उपाय

  1. भाभी,आप तो हर वक्त मजाक ही करते रहते हैं। मैं शर्माते हुए मन में भैया को याद करते झूठ बोल दी। मजाक मैं नहीं आप कर रही हैं। जल्दी से आप बताओगी या फिर मैं उसका नाम बोलूँ। भाभी एक बार फिर जोर देते हुए पूछी।
  2. दोनों मैडम एक साथ चिल्ला पड़ी- नहीं सोमू, तेरे लंड ने तो हमारी चूतें चोद चोद कर लाल कर दी हैं, इनको सुजा दिया है। अब दो दिन कोई लंड वंड नहीं चाहिए। जगण्याचा पाया चालण्याचे बळ
  3. जब देखा कि पूनम को शायद नागवार लगा है तो मैंने अपना दायाँ हाथ बढ़ा कर उसको अपने नज़दीक कर लिया और उसके मोटे मुम्मों से खेलने लगा और साथ ही उसके मुंह से मुंह जोड़ कर उसको चूमने लगा। हाँ जहाँ मुड़ी वहाँ की जरूर जल रही थी जिसके नीचे खड़े 4 लोग आपस में बात कर रहे थे...तभी उनमें से एक बोला,ऐ हिरो... रूक..
  4. హిందీ బిఎఫ్ హెచ్ డి...असल बात तो बताओ. बस जीजा साले की तरह रह रहे हो कि कुछ साली और जीजा जैसा भी हुआ है? तुमने उसे परेशान तो नहीं किया अकेले में? स्टेप-सिस्टर: उर्वशी(उर्वी) बस अगर इसके बारे मे लिखूं तो 100स पेज भर जाएँगे.. जान है मेरी .. या यूँ कहो मेरा सब कुछ.
  5. वो जल्दी से अपना जाने का छोटा सा बैग तैयार करके ले आई और मैं उसको बस स्टैंड पहुँचा आया और उसके गाँव की बस में भी बिठा आया और उसको कुछ रूपए भी दे दिए ताकि रास्ते में कष्ट ना हो, यह भी कहा कि वो मुझको घर पहुँच कर फ़ोन ज़रूर करे और मम्मी का हाल भी बता दे। निर्मला मैडम की चूत से अब क्रीम जैसा रस निकलना शुरू हो गया जो रंग में क्रीम जैसा सफ़ेद और गाढ़ा था और यह देख कर मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी और मैडम की चूत से निकलती फच फ़च आवाज़ बड़ी मधुर लगने लगी।

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वो भी अब पूरी तरह सहयोग देने लगी और अब मैंने अपने पज़ामे को नीचे खिसका दिया और अपना खड़ा लौड़ा उसके हाथ में दे दिया और लौड़े को छूते ही उसके शरीर में हल्का सा करंट दौड़ गया।

मैं भी कोई मौका नहीं छोड़ता उसके चूतड़ों को हाथ लगाने में और उसकी रेशमी साड़ी पर मेरा हाथ उसके गोल गोल नितम्बों पर फिसल जाता था। अब मैंने देवकी को लिटा कर उसकी जांघों में बैठ कर अपना मुंह उस की चूत पर टिका दिया और उसकी चूत को और उसके अंदर छिपे भग को चूसने और चाटने लगा।

హిందీ బిఎఫ్ హెచ్ డి,मैं बोला- कर दीजिये। वैसे मैं अपने कपड़े सिवाय बाथरूम में, अपने आप कभी नहीं उतारता। पर उससे पहले आप दोनों सुंदरियाँ भी अपने नाइटी उतारे दें तो मुझ को बहुत आनन्द आएगा।

तेरी मर्जी. जैसे में मजा आता है वैसा कर. वैसे ब्रा और पैंटी पहनकर तू बिलकुल लीना जैसा लगता है. वो तो रात को हमेशा ऐसे ही बैठती है. और शादी के बाद पहली बार मैं ऐसा अकेला हूं घर में, तू है तो लीना ही यहां है ऐसा लगता है

भैया : हम्म्मऽ तो डर लग रहा है...मैं उनकी बात सुन श्याम की तरफ देख डर से भयभीत चेहरे को हाँ में हिला दी...नंगे सेक्सी फिल्म

शुरू शुरू में तो वान्हा में मेरा दिल बिल्कुल नही लगा लेकिन जब सलमान भाई ने मुझे स्कूल में दाखला दिला दिया तो में वहाँ की लाइफ की आदि होती गयी. हो सकता है मेरी कहानी में यह सब डीटेल्स आपको बोरिंग लगें मगर इस के बगैर इस कहानी को लिखना मुमकिन नही था मेरे लिये. फिर हमने वापस बेडरूम में गई तो पूजा नहीं थी..शायद बाथरूम गई थी..श्याम अभी भी बेड पर पड़े हुए थे..मैं उनके पास बैठती हुई उनके सीने पर किस करती हुई बोली,उठिए ना...ऑफिस नहीं जाना...

वो भी हर धक्के का जवाब दे रही थी और अपनी चुदाई में पूरी तरह से सहायक बन रही थी, उसके छोटे मगर सॉलिड मुम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे और बाद में मैं उनके चूचुकों को अपने मुंह भी ले रहा था और गोल गोल चूस रहा था।

मैं अपनी मुलाकात सुनते ही समझ गई कि दीदी कैसी मुलाकात करवानी वाली है.. तेज कदमों से भागती मैं तुरंत ही लिफ्ट तक पहुँच गई..,హిందీ బిఎఫ్ హెచ్ డి बोर क्यों? घुमाना बंबई रोज. ऑफ़िस से जल्दी आ जाया करना वो ऐसे कह रही थी जैसे ये सब बड़ा आसान हो. मैं जरा धर्मसंकट में था. बीच में ये भी लगता कि ये फ़िर से लीना का कोई खेल तो नहीं है.

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